मिंटस् ऑफ मिंटिग्स बन कर रह गया किसानों का दर्द : राजेन्द्र

एक और चौधरी चरण सिंह की जरूरत है आज के किसानों को

विरेन्द्र चौधरी

जिस दौर में चौधरी चरण सिंह भारत की राजनीति में किसानों के कवच के रूप में आगे बढ़ रहे थे उस दौर के किसानों के लिए पढाई लिखाई मात्र सपने के समान थी ।लेकिन उनके लिए एक ऐसा इंसान आया जिसने उनके दर्द को ना केवल समझा, बल्कि उसे मलहम भी दी और भारत के किसानों को हजारों साल के इस सपने को सच किया जिसे देखने के लिए कई पीढ़ियों चल बसी और अपनी जमीन जिसमें वो खुद की फसल बोए और शान से अपनी छाती चौड़ी कर सके कि वो जमीदार के लिए नहीं बल्कि अपने खेत में खेती किसानी करता है।
इस एक कदम जिसे जमींदारी विनाश अधिनियम के नाम से जाना गया इसने किसानों को इतनी उर्जा दी कि उसने ना केवल अपने परिवार को पाला बल्कि अपने बच्चों को शिक्षा के मंदिरों का रास्ता दिखाने का काम किया और देश के लिए इतना अन्न पैदा किया कि आज भारत लगभग सभी उपज नियार्त करता है लेकिन पिछले दो दशकों से जैसे इस किसान के खेत को कोई बुरी नजर लग गई और धीरे धीरे सरकार इनके प्रति उदासीन रवैया अपनाती आ रही है और आज फिर आजाद भारत के किसानों को खुद को बचाने की कोशिश करनी होगी मगर विडंबना है कि आज चौधरी साहब जैसा अववल पैरोकार नहीं जो सीना ठोक अपने हाईकमान के सामने आवाज़ उठाने की हिम्मत कर सकें।
शायद आज मेरे देश का पेट भर गया है, और उसे भूख नाम से एक दूरी हो गई है, विडम्बना तो ये है कि जिसने उनके पेट को भरा आज उसके ही तयाग, मेहनत और बलिदान को भुला उसके दोहन में लगे बिचौलियों को सरकार का पूर्ण संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में किसानों को एक सच्चे दोस्त की अनंत जरूरत है, जो इन गूंगी बहरी इमारतों को अपना एहसास कराने की जिनमें बैठे लोग किसानों को छलते है और किसानों का दर्द मात्र मिनिट्स आफ मिटिंग बनकर रह जा रहीं हैं।
आज चौधरी साहब की आत्मा को बहुत तकलीफ पहुँच रही होगी कि उनका किसान आजाद भारत में भी कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या कर रहा है और सत्ता सीन चुप है। इसलिए आज भारत के किसानों को एक शशक्त किसान नेता की जरूरत है और यह राष्ट्र हित के लिए आवश्यक भी है।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री चौधरी चरण सिंह जी को उनके जन्म दिवस पर समर्पित।
राजेन्द्र चौधरी की कलम ✒ से

News Reporter

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