संत रविदास सिमित नहीं अससिमित है – प्रोफेसर मीरा गौतम

विरेन्द्र चौधरी

कैथल। हरियाणा के जनपद कैथल में ग्लोबल हिंदी साहित्य शोध संस्थान व अंर्तराष्ट्रीय हिंदी संस्थान(एशिया यूरोप)बेल्जियम द्वारा संत रविदास के कथन “मन चंगा तो कठोती में गंगा” को लेकर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डा०मार्कण्डेय आहुजा कुलपति गुरूग्राम विश्वविद्यालय, विशिष्ठ अतिथि कपिल कुमार बेल्जियम, विशेष वक्ता डा०कामराज सिंधु चैयरमैन ग्लोबल हिंदी साहित्य शोध संस्थान, कार्यक्रम की अध्यक्षता डा०रामपाल सैनी प्राचार्य डीएवी कालेज करनाल, विषय प्रवेश संचालक ऋषि पाल एसोसिएट प्रोफेसर बा.ए.रा जनता कालेज कैल कैथल व मुख्यवक्ता सहारनपुर की प्रोफेसर मीरागौतम ने उपस्थित रह विचार ब्यक्त किये।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डाक्टर मार्कण्डेय आहुजा ने महात्मा बुद्ध से लेकर भर्तृहरि तक के जीवन चरित्र की व्याख्या की।विशिष्ठ अतिथि कपिल कुमार ने संतो के जीवन उनके उपदेशों की सुंदर और सटीक व्याख्या की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाक्टर रामपाल सैनी ने संत रविदास वाणी को गायन के माध्यम से समझाते हुए संत वाणी को जीवन में आत्मसात करने को कहा।इस सेमिनार में लगभग 2600 गणमान्यजनों ने हिस्सेदारी निभाई

कार्यक्रम की मुख्यवक्ता प्रोफेसर मीरा गौतम ने संत रविदास के “मन चंगा तो कठौती में गंगा”मनोभाव व वाणी का वर्णन करते हुए कहा कि इन्हीं शब्दों में संत रविदास का पूरा जीवन समाहित है।ये शब्द जीवन के लिए एक मंत्र हैं,जो दिशां संकेत करते है कि अपनी अंतर आत्मा के अंदर झांको।प्रोफेसर मीरा ने कहा जिस मनुष्य ने अपनी आत्मा में झांकते हुए इन शब्दो को गुण बना लिया,वह स्वयं संत रविदास हो गया। प्रोफेसर मीरा गौतम बताया संत रविदास की साधना को, उनके शब्दों को साधना सरल नहीं है।अपने विचारों को आगे ले जाते हुए कहा “नरहरि मन चंचल है मति मौरी” और “माटी के पुतरो कैसे नचत है” में मानव मन को दर्शाया है कि मानव मन चंचल है वो हमेशा इधर-उधर सांसरिकता की ओर इधर-उधर दौड़ता रहता है।

मीरा गौतम ने संत रविदास की वाणी के भावार्थः को समझाते हुए कहा मन पर काबू पाने के लिए हरि नाम एक ऐसी पतवार है जिसे पकड़कर भव सागर से पार किया जा सकता है। मुख्य वक्ता मीरा गौतम ने संत रविदास को गुरू कहते हुए अपने संबोधन में कहा संत को किसी जाति विशेष में नहीं बांधा जा सकता। संत रविदास सिमित नहीं अससिमित है। संत रविदास को अपने कर्म-श्रम और अपनी जाति पर गर्व था।मीरा गौतम ने समझाया अपने जन्म से कोई नीच नहीं होता,इसे संत रविदास ने सिद्ध किया है।
मीरा गौतम ने कहा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रविदास पर अनेक विषय संभावित है।जिसमें पर्यावरण और गांधीवाद के अलावा विभिन्न दृष्टिकोणों से रविदास पर शोधों को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा संत रविदास एक मनोवैज्ञानिक भी थे,शोध के लिए मनुष्य का मनोविज्ञान भी एक पक्ष है।वर्तमान युग में बिखरावों को समेटने के लिए संत रविदास की वाणी अत्यंत प्रांसगिक है

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