शासन प्रशासन से असंतुष्ट किरण तिवारी

विरेन्द्र चौधरी
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के शासन में हिंदू नेता की हत्या हो जाती है और उसकी पत्नी का ब्यान आये कि उसे हत्याकांड के मात्र एक चश्मदीद गवाह की चिंता है,साथ ही वो पुलिस की जांच से भी सतुष्ट नहीं है।तो आप उस शासन को क्या कहेगें।
विगत दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी में एक हिंदू नेता कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई थी। कमलेश तिवारी ने हत्या से ठीक एक दिन पहले बकौल किरण तिवारी हिंडौला थाने के इंचार्ज से कहा था कि,उनकी जान को खतरा है।लेकिन राजधानी जैसी जगह भी पुलिस संवेदनहीन बनी रही,और कमलेश तिवारी की हत्या हो गयीं। कमलेश के हत्यारे गिरफ्तार हो गयें।लेकिन मृतक की पत्नी का कहना है कि वो पुलिस की जांच से संतुष्ट नही है। उनका कहना है कि जांच राष्ट्रीय सुरक्षा एंजेसी से होनी चाहिए।
किरण तिवारी का कहना है कि मेरे पति की हत्या के बाद 15 लाख की मदद की गई।जबकि दादरी लिचिगं के मामले में 50 लाख दिये गये।ऐसा दोहरा मापदंड क्यूं ? श्रीमती तिवारी ने कहा उन्होंने 15 लाख रूपये संभाल कर रखे है। जब एक भाजपा नेता की इसी तरह हत्या हो जायेगी तो मैं इस राशि में म़े 15 लाख और मिलाकर 30 लाख दूंगी। उन्होंने कहा जब तक उसके पति के हत्यारों को फांसी पर नही लटकाया जाता वो शंति से नहीं बैठेगी।
यहां सवाल मात्र एक किरण तिवारी के आक्रोश का सवाल नही है। हत्या और बलात्कार के समाचारों से अखबार रगें हुए है। इससे जाहिर है कि ना जाने कितने लोग न्याय से असंतुष्ट होगें। इतने बडे़ सूबे की व्यवस्था संभालना आसान काम नही है।जब तक छोटे प्रदेश नही बनेगें,अपराध और सरकारी लाॅबी पर काबू पाना संभव नही हो पायेगा। सच यह है कि बडा़ प्रदेश ही इन मूल समस्याओं की जड़ है। लगभग 24 करोड़ के उत्तर प्रदेश मेेंं संख्या बल के हिसाब सेे प्रशासनिक अमला कम है।

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